Panchamukhi Hanuman – Rare Photo

13 Jan

Panchamukhi Hanuman - Rare Picture

For the great significance and accurate interpretation of Panchamukhi Hanuman, please visit http://www.punditravi.com/rare_forms_of_hanuman.htm

19 Responses to “Panchamukhi Hanuman – Rare Photo”

  1. narendra Friday, May 30, 2008 at 14:49 #

    i see to original photos of lord bhagvan hanuman

  2. sarwan kumar pathak Wednesday, December 3, 2008 at 11:35 #

    want to preview the pictures of punchmukhi hanumaan ji!
    the gr8 supernatural power

  3. Himanshu Kaushik Wednesday, December 3, 2008 at 21:59 #

    om hanuman namhe

  4. gaurav Tuesday, April 7, 2009 at 15:21 #

    never seen such a beautiful photo of sri hanuman & tulsidasji feeling being blessed. ‘OM SRI HANUMANTAYE NAMAHA’

  5. sonia Tuesday, April 21, 2009 at 13:20 #

    Jai Anjani Sutt Hanuman
    Jai Pawan Putra Hanuman

  6. rahul tusnial Friday, November 27, 2009 at 22:38 #

    hi…….. very nice to see the pic here. i am looking for english text of panchmukhi hanuman kavach. cannot find it anywhere……….. really very important for me to have it. can u suggest how and where to get hold of it?? and if u can find it somewhere, can u please mail it to me?? will truly appreciate any help from your side. thanks. rahul.

    • mukund Saturday, June 4, 2011 at 11:36 #

      panchmukhi hanuman kavach

      श्री गणेशाय नम: | ओम अस्य श्रीपंचमुख हनुम्त्कवचमंत्रस्य ब्रह्मा रूषि:| गायत्री छंद्:| पंचमुख विराट हनुमान देवता| र्‍हीं बीजम्| श्रीं शक्ति:| क्रौ कीलकम्| क्रूं कवचम्| क्रै अस्त्राय फ़ट्| इति दिग्बंध्:| श्री गरूड उवाच्||

      अथ ध्यानं प्रवक्ष्यामि| श्रुणु सर्वांगसुंदर| यत्कृतं देवदेवेन ध्यानं हनुमत्: प्रियम्||१||

      पंचकक्त्रं महाभीमं त्रिपंचनयनैर्युतम्| बाहुभिर्दशभिर्युक्तं सर्वकामार्थसिध्दिदम्||२||

      पूर्वतु वानरं वक्त्रं कोटिसूर्यसमप्रभम्| दंष्ट्राकरालवदनं भ्रुकुटीकुटिलेक्षणम्||३||

      अस्यैव दक्षिणं वक्त्रं नारसिंहं महाद्भुतम्| अत्युग्रतेजोवपुष्पंभीषणम भयनाशनम्||४||

      पश्चिमं गारुडं वक्त्रं वक्रतुण्डं महाबलम्| सर्वनागप्रशमनं विषभूतादिकृन्तनम्||५||

      उत्तरं सौकरं वक्त्रं कृष्णं दिप्तं नभोपमम्| पातालसिंहवेतालज्वररोगादिकृन्तनम्| ऊर्ध्वं हयाननं घोरं दानवान्तकरं परम्| येन वक्त्रेण विप्रेन्द्र तारकाख्यमं महासुरम्||७||

      जघानशरणं तस्यात्सर्वशत्रुहरं परम्| ध्यात्वा पंचमुखं रुद्रं हनुमन्तं दयानिधिम्||८||

      खड्गं त्रिशुलं खट्वांगं पाशमंकुशपर्वतम्| मुष्टिं कौमोदकीं वृक्षं धारयन्तं कमण्डलुं||९||

      भिन्दिपालं ज्ञानमुद्रा दशभिर्मुनिपुंगवम्| एतान्यायुधजालानि धारयन्तं भजाम्यहम्||१०||

      प्रेतासनोपविष्टं तं सर्वाभरण्भुषितम्| दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानु लेपनम सर्वाश्चर्यमयं देवं हनुमद्विश्वतोमुखम्||११||

      पंचास्यमच्युतमनेकविचित्रवर्णवक्त्रं शशांकशिखरं कपिराजवर्यम्| पीताम्बरादिमुकुटै रूप शोभितांगं पिंगाक्षमाद्यमनिशं मनसा स्मरामि||१२||

      मर्कतेशं महोत्राहं सर्वशत्रुहरं परम्| शत्रुं संहर मां रक्ष श्री मन्नपदमुध्दर||१३||

      ओम हरिमर्कट मर्केत मंत्रमिदं परिलिख्यति लिख्यति वामतले| यदि नश्यति नश्यति शत्रुकुलं यदि मुंच्यति मुंच्यति वामलता||१४||

      ओम हरिमर्कटाय स्वाहा ओम नमो भगवते पंचवदनाय पूर्वकपिमुखाय सकलशत्रुसंहारकाय स्वाहा|

      ओम नमो भगवते पंचवदनाय दक्षिणमुखाय करालवदनाय नरसिंहाय सकलभूतप्रमथनाय स्वाया|

      ओम नमो भगवते पंचवदनाय पश्चिममुखाय गरूडाननाय सकलविषहराय स्वाहा|

      ओम नमो भगवते पंचवदनाय उत्तरमुखाय आदिवराहाय सकलसंपत्कराय स्वाहा|

      ओम नमो भगवते पंचवदनाय उर्ध्वमुखाय हयग्रीवाय सकलजनवशकराय स्वाहा|

      ||ओम श्रीपंचमुखहनुमंताय आंजनेयाय नमो नम:||

      टीप्: मला काही अक्षरे टाईप करता येत नाही आहेत

  7. sreekanth Friday, February 19, 2010 at 10:38 #

    how to pooja

  8. shivesh narayan Sunday, June 20, 2010 at 01:12 #

    om namo hanumate ramdutay namah !!!!

  9. abhishek Saturday, July 31, 2010 at 18:47 #

    jai hanuman
    jai shri ram

  10. sagar patade Sunday, August 1, 2010 at 15:49 #

    jai shree ram

  11. Smi Friday, September 24, 2010 at 08:28 #

    was searching dis pic……..i found it

  12. rajath Sunday, October 31, 2010 at 12:41 #

    this iz a rare photo of hanuman..

  13. vaibhav Sunday, December 5, 2010 at 22:34 #

    jai bajrangi bala , mata anjani ka lala.

    Jai Bajrangbali hanuman mangalmurat kripa nidhan

    Jai siya ram jai jai siya ram

    • vaibhav Sunday, December 5, 2010 at 22:35 #

      jai sita ram jai radhe shyam jai siyaram jai radheshyam

  14. mukund Saturday, June 4, 2011 at 11:25 #

    hanumanji ki jay ho kalyankari bhagwan sabaka bhala karte hai

    panch mukhi hanumanji sab prani o ko sukh santi dete hai

    aur har disha se raksha karte hai

    • mukund Saturday, June 4, 2011 at 11:34 #

      panchmukhi hanuman kavach

      श्री गणेशाय नम: | ओम अस्य श्रीपंचमुख हनुम्त्कवचमंत्रस्य ब्रह्मा रूषि:| गायत्री छंद्:| पंचमुख विराट हनुमान देवता| र्‍हीं बीजम्| श्रीं शक्ति:| क्रौ कीलकम्| क्रूं कवचम्| क्रै अस्त्राय फ़ट्| इति दिग्बंध्:| श्री गरूड उवाच्||

      अथ ध्यानं प्रवक्ष्यामि| श्रुणु सर्वांगसुंदर| यत्कृतं देवदेवेन ध्यानं हनुमत्: प्रियम्||१||

      पंचकक्त्रं महाभीमं त्रिपंचनयनैर्युतम्| बाहुभिर्दशभिर्युक्तं सर्वकामार्थसिध्दिदम्||२||

      पूर्वतु वानरं वक्त्रं कोटिसूर्यसमप्रभम्| दंष्ट्राकरालवदनं भ्रुकुटीकुटिलेक्षणम्||३||

      अस्यैव दक्षिणं वक्त्रं नारसिंहं महाद्भुतम्| अत्युग्रतेजोवपुष्पंभीषणम भयनाशनम्||४||

      पश्चिमं गारुडं वक्त्रं वक्रतुण्डं महाबलम्| सर्वनागप्रशमनं विषभूतादिकृन्तनम्||५||

      उत्तरं सौकरं वक्त्रं कृष्णं दिप्तं नभोपमम्| पातालसिंहवेतालज्वररोगादिकृन्तनम्| ऊर्ध्वं हयाननं घोरं दानवान्तकरं परम्| येन वक्त्रेण विप्रेन्द्र तारकाख्यमं महासुरम्||७||

      जघानशरणं तस्यात्सर्वशत्रुहरं परम्| ध्यात्वा पंचमुखं रुद्रं हनुमन्तं दयानिधिम्||८||

      खड्गं त्रिशुलं खट्वांगं पाशमंकुशपर्वतम्| मुष्टिं कौमोदकीं वृक्षं धारयन्तं कमण्डलुं||९||

      भिन्दिपालं ज्ञानमुद्रा दशभिर्मुनिपुंगवम्| एतान्यायुधजालानि धारयन्तं भजाम्यहम्||१०||

      प्रेतासनोपविष्टं तं सर्वाभरण्भुषितम्| दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानु लेपनम सर्वाश्चर्यमयं देवं हनुमद्विश्वतोमुखम्||११||

      पंचास्यमच्युतमनेकविचित्रवर्णवक्त्रं शशांकशिखरं कपिराजवर्यम्| पीताम्बरादिमुकुटै रूप शोभितांगं पिंगाक्षमाद्यमनिशं मनसा स्मरामि||१२||

      मर्कतेशं महोत्राहं सर्वशत्रुहरं परम्| शत्रुं संहर मां रक्ष श्री मन्नपदमुध्दर||१३||

      ओम हरिमर्कट मर्केत मंत्रमिदं परिलिख्यति लिख्यति वामतले| यदि नश्यति नश्यति शत्रुकुलं यदि मुंच्यति मुंच्यति वामलता||१४||

      ओम हरिमर्कटाय स्वाहा ओम नमो भगवते पंचवदनाय पूर्वकपिमुखाय सकलशत्रुसंहारकाय स्वाहा|

      ओम नमो भगवते पंचवदनाय दक्षिणमुखाय करालवदनाय नरसिंहाय सकलभूतप्रमथनाय स्वाया|

      ओम नमो भगवते पंचवदनाय पश्चिममुखाय गरूडाननाय सकलविषहराय स्वाहा|

      ओम नमो भगवते पंचवदनाय उत्तरमुखाय आदिवराहाय सकलसंपत्कराय स्वाहा|

      ओम नमो भगवते पंचवदनाय उर्ध्वमुखाय हयग्रीवाय सकलजनवशकराय स्वाहा|

      ||ओम श्रीपंचमुखहनुमंताय आंजनेयाय नमो नम:||

      टीप्: मला काही अक्षरे टाईप करता येत नाही आहेत

      हितगुज गणेशोत्सव २००६

      चोखंदळ ग्राहक
      महाराष्ट्र धर्म वाढवावा
      व्यक्तिपासून वल्लीपर्यंत
      पांढर्‍यावरचे काळे
      गावातल्या गावात
      तंत्रलेल्या मंत्रबनात
      आरोह अवरोह
      शुभंकरोती कल्याणम्
      विखुरलेले मोती

  15. Venkat Friday, August 12, 2011 at 10:01 #

    Jai Chiranjeeva Jai Sri Ram

  16. ANUJJ Saturday, December 10, 2011 at 15:41 #

    what to talk about shri hanuman ji he does want to hear any thing in his favour what he want to listen chanting of shri RAM so say JAI SHREE RAM

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